गैलीलियो – आधुनिक युग के पिता

  • जन्म – 15 फरवरी, 1564
  • मृत्यु – 8 जनवरी, 1642
  • पिता – विसेंजियों गॅलिली
  • माता – जूलिया
  • जन्मस्थल – Pisa, Italy
  • मृत्युस्थल – Arcetri, Italy
  • आविष्कार – शक्तिशाली दूरबीन , बृहस्पति के चंद्रमा ,  भौतिकी के अध्ययन

गैलीलियो का जन्म 15 फरवरी 1564 को इटली के पीसा नामक शहर में हुआ ! उन्होंने अपनी स्कूल शिक्षा पीसा यूनिवर्सिटी की यह भाई बहनों में सबसे बड़ी थे
गैलीलियो के पिता चाहते थे कि एक डॉक्टर बने इसलिए उनको मेडिसिन की पढ़ाई के लिए दाखिल करा दिया परंतु उनका मन गणित मैं ज्यादा था इसीलिए उन्होंने मेडिसन की पढ़ाई छोड़ गई गणित की पढ़ाई करना चालू कर दिया

गैलीलियो के घर की स्थिति खराब होने के कारण उन्हें मजबूरन अपनी पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ी बह बहुत अच्छे संगीतकार भी थे !
गैलिली ने कहा था कि भोतिकी के नियम वही रहते है चाहे कोई पिंड स्थिर हो या समान वेग से सरल रेखा में गतिशील हो। इसी को बाद में न्यूटन ने समझाया था। गैलीलियो ने जड़त्व के सिद्धान्त को भी दिया था। इसके अनुसार किसी समतल पर गतिशील वस्तु तब तक उसी वेग और दिशा में गति करेगी जब तक कि उसे छेड़ा ना जाये लेकिन समतल और वस्तु के बीच मे घर्षण नही होना चाहिये। इसी को नूटन ने अपने गति के पहले सिद्धान्त में समझाया था।

गैलिली ने ही बताया था कि अधिक भार और कम भार वाली वस्तुओ को अगर ऊपर से एक साथ नीचे गिराए तो दोनों वस्तुए का नीचे गिरने का समय एक ही होगा। गैलीलियो का यह सिद्धान्त अरस्तु के सिद्धान्त से उलट था कि अधिक भार वाली वस्तु पहले नीचे गिरेगी।
गौलीलियो वैज्ञानिक कोपर्निकस के नियम पर प्रयोग शुरू किया। कोपर्निकस ऐसे विअज्ञानिक थे जिन्होंने सबसे पहले बताया था की पृथ्वी गोल है और पृथ्वी समेत सभी ग्रह सूर्य के ईर्द-गिर्द चक्कर लगाते हैं। कोपर्निकस को इस खोज के कारण कट्टर ईसाइयों ने जिंदा जला दिया था जिनके अनुसार सूर्य समेत ब्रम्हांड के सभी पिंड पृथ्वी के ईर्द – गिर्द चक्कर लगाते हैं। लेकिन गौलीलियो ने इसे फिर से सिद्ध किया और बताया की ब्रह्माण्ड का सभी गृह सूर्य का चक्कर लगाते हैं।
गैलिलियो की दूरबीन तो आकाश का निरीक्षण करने में भी सफल थी । इस दूरबीन से उसने यह साबित किया कि सूर्य में धब्ये हैं । आकाशगंगा तारों का झुण्ड है । बृहस्पति ग्रह के कई उपग्रह हैं । कैथोलिक धर्म में विश्वास रखने वाले होगो ने गैलिलियो के दूरबीन सम्बन्धी आविष्कार की बहुत आलोचना की । बाइबिल में यह लिखा गया था कि सूर्य घूमता है । पृथ्वी स्थिर है । 

गैलीलियो ने जब 1609 ईसवीं में सुना की हालैंड के एक वैज्ञानिक द्वारा दूरबीन की खोज़ की गयी हैं जिसे दूर की वस्तु करीब दिखती हैं गैलीलियो ने इसका विवरण सुनकर स्वयं ऐसी दूरबीन का निर्माण कर डाला जो हालैंड में अविष्कृत दूरबीन से कहीं अधिक शक्तिशाली थी।
तो उन्होंने कुछ ही समय में उससे बेहतर दूरबीन का अविष्कार कर लिया। 25 अगस्त 1609 को गैलिलियो ने अपने आधुनिक दूरदर्शी का सार्वजनिक प्रदर्शन किया। फिर शुरू हुआ खगोलीय खोजों का एक अद्भुत अध्याय। गैलीलियो ने चांद को देखा उसके ऊबड़-खाबड़ गङ्ढे देखे। इसके आलावा उन्होंने कई ग्रहो पर नजर डाला।

वर्ष 1633 में 69 वर्षीय वृद्ध गैलीलियो को चर्च की ओर से यह कहा गया कि यदि वे धार्मिक मान्यताओं के विरुद्ध दिये गये उनके सिद्धांत पर सार्वजानिक रूप से माफ़ी मांग लेते हैं तो उनकी सजा माफ़ कर दी जाएगी। अपने बुढ़ापे को देखते हुए उन्होंने ऐसा किया भी लेकिन उन्हें फिर से कारावास में डाल दिया गया। जहाँ उनकी हालत लगातार ख़राब होती रही और इसी के चलते कारावास से हटाकर उनके घर में ही कैद कर दिया गया। अपने जीवन का आखिरी दिन 8 जनवरी 1642 उन्होंने इसी कैद में ही बिताया।

अपने टेलिस्कोप से जुपिटर (Jupiter) ग्रह के चार चंद्रमाओं की खोज की. यहीं से टोलेमी (Tolemy) और अरस्तू (Arastu) की परिकल्पनाओं की नीव हिल गई. जिनमें सभी पिंडों की गतियों का केन्द्र पृथ्वी को बताया गया था. अपने प्रयोगों के आधार पर उसने कोपरनिकस (Copernicus) की थ्योरी का समर्थन किया, जिसके अनुसार सभी ग्रहों की गति का केन्द्र सूर्ये है. हालांकि यह परिकल्पना भारतीय तथा मुस्लिम वैज्ञानिकों में पहले से मौजूद थी किंतु योरोपियन चर्च इससे सहमत न होकर अरस्तू की थ्योरी पर ही विश्वास रखते थे. इस कारण गैलिलियो के कथन को कैथोलिक चर्चों के विरोध का सामना करना पड़ा.
सामाजिक और धार्मिक प्रताडना के चलते पूर्व से व्याप्त मान्यताओं और विश्वासों के विपरीत प्रतिपादित सिंद्वांतो के साथ वे अधिक दिन तक खडे नहीं रह सके।

गैलिलियो ने खंडन करते हुए कहा की उसने कहीं भी बाइबिल के विरुद्ध कुछ नही कहा है. फ़िर भी उसे अपने जीवन के अन्तिम दिन रोमन साम्राज्य की कैद में बिताने पड़े.